तुलसी की पौराणिक कथा श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी एक श्राप के कारण तुलसी के पौधे में बदल गई थीं। तुलसी (पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी, जिसका नाम वृंदा था। राक्षस कुल में जन्मी यह बच्ची बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी। वृंदा सती हो गईं...
जब पांडव पासे का खेल हारने के बाद जंगल में जाते हैं, तो एक दिन भीम का सामना हनुमान से होता है, जो एक बूढ़े बंदर के रूप में प्रच्छन्न हैं। वह हनुमान से अपनी पूंछ को अपने रास्ते से हटाने के लिए कहते हैं
विष्णु द्वारा अपने अगले जन्म में वृंदा से शादी करने के आशीर्वाद के अनुसार, विष्णु - शालिग्राम के रूप में - प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी से विवाह किया। इस घटना को मनाने के लिए तुलसी विवाह की रस्म निभाई जाती है।
शंख (पाञ्चजन्य),चक्र (सुदर्शन), गदा (कौमोदकी) और पद्म, धनुष (सारंग), तलवार नंदक और फरसा परशू !
अनसूया प्रजापति कर्दम और देवहूति की 9 कन्याओं में से एक तथा अत्रि मुनि की पत्नी थीं। उनकी पति-भक्ति अर्थात् सतीत्व का तेज इतना अधिक था के उसके कारण आकाशमार्ग से जाते देवों को उसके प्रताप का अनुभव होता था। इसी कारण उन्हें 'सती अनसूया' भी कहा जाता है।