कार्तिकेय ,गणेश , अशोकसुन्दरी , अय्यपा, मनसा देवी और ज्योति
आँख से आ रहा है। इस स्थिति को देखने में असमर्थ कन्नप्पा ने अपनी आंख चढ़ाने का फैसला किया और इसलिए उन्होंने एक तीर से अपनी आंख निकालकर शिवलिंग पर रख दी। फिर दूसरी आंख से खून आने लगा। यह देखकर और कोई विकल्प न पाकर, उन्होंने अपना दूसरा नेत्र भी भगवान शिव को अर्पित करने का निर्णय लिया।
अत्रि ऋषि सती अनुसुईया के पति थे। सती अनुसुईया सोलह सतियों में से एक थीं। जिन्होंने अपने तपोबल से ब्रम्हा, विष्णु एवं महेश को बालक रूप में परिवर्तित कर दिया था। पुराणों में वर्णित है कि इन्हीं तीनों देवों ने माता अनुसुईया से वरदान प्राप्त किया था, कि हम आपके पुत्र रूप में आपके गर्भ से जन्म लेंगे ।