केवट रामायण का एक विशेष पात्र है, जिसने वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम को माता सीता और लक्ष्मण के साथ अपनी नाव में बिठाकर गंगा पार कराया था। रामायण के अयोध्या कांड में निषादराज केवट का वर्णन मिलता है।
ऋषि दुर्वासा के क्रोध से बचाने के लिए श्रीराम ने दिया था लक्ष्मण को इस तरह का दंड। यम देव को दिए वचन से बंधे थे श्रीराम। जानिए क्या है इस घटना की पौराणिक कथा। Shri Ram and Laxman: रामायण में वर्णित है कि श्रीराम ने न चाहते हुए भी प्राण से अधिक प्रिय अपने लघु भ्राता लक्ष्मण को मृत्युदंड दिया था।
सुषेण वैद्य ने भगवान राम के जीवन संकट के लिए भगवान राम को संजीवनी बूटी के बारे में बताया था। लंका के एक वैद्य सुषेण जी ने लंका के राजा रावण के छोटे भाई विभीषण को कहाँ के बारे में बताया था। तब हनुमान जी लंका गए और विभीषण के कहे अनुसार सुषेण वैद्य को उनके घर सहित ले आएं। जब वैद्य जी आये तो इलाज से मना कर दिया क्योंकि वे राम के भाई थे या श्री राम रावण के शत्रु फिर विभीषण जी के समझने के बाद उनके इलाज के लिए माने फिर वैद्य जी ने बताया की संजीवनी ही एक आखिरी रहता है फिर हनुमान जी जा करके बूटी की जगह पूरा पहाड़ ही ले आये, तब लक्ष्मण जी की जान बच गयी।
राम नाम के विष्णु अवतार को अन्य नामों से भी जाना जाता है। उन्हें रामचंद्र (सुंदर, प्यारा चंद्रमा), या दशरथी (दशरथ का पुत्र), या राघव (हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में रघु के वंशज, सौर वंश) कहा जाता है।