माता संतोषी
माता संतोषी की उत्पत्ति
पौराणिक ग्रंथों में इस कथा के लिए कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है। मान्यताओं के आधार पर कहा जाता है कि भगवान गणेश के दो पुत्रों के साथ एक पुत्री भी थीं जिनका नाम माता संतोषी था। भगवान गणेश की दो पत्नियां रिद्धि और सिद्धि थीं जिनसे उन्हें दो पुत्र शुभ और लाभ हुए। ।मां संतोषी को आश्चिका नाम से भी जाना जाता है। इन्हें खीर तथा गुड़ चने का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
भगवान गणेश ने अपनी विशेष शक्तियों से एक ज्योति उत्पन्न की और उनकी दोनों पत्नियों की आत्मशक्ति के साथ उसे सम्मलित कर लिया। इस ज्योति ने कन्या का रुप धारण कर लिया और गणेश जी की पुत्री का जन्म हुआ। जिसे संतोषी का नाम दिया गया
माता संतोषी को दुर्गा का अवतार भी माना जाता है। इसी के साथ माता संतोषी के जन्म को लेकर ये दुविधा रहती है कि वो भगवान गणेश की पुत्री हैं। भगवान गणेश को बल, बुद्धि और विद्या का देवता माना जाता है।शुक्रवार को माता संतोषी की पूजा किए जाने का विशेष विधान है क्योंकि इसी दिन माता संतोषी का जन्म हुआ थाआपको बता दें कि संतोषी नाम का अर्थ एक देवी का नाम, संतुष्ट, संतुष्ट, खुश होता है।
संतोषी माँ महामंत्र:
जय माँ संतोषिये देवी नमो नमः श्री संतोषी देव्व्ये नमः ॐ श्री गजोदेवोपुत्रिया नमः ॐ सर्वनिवार्नाये देविभुता नमः
संतोषी माता के पिता गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि धन, धान्य, सोना, चांदी, मूंगा, रत्नों और ज्ञान से भरा पूरा परिवार है। इसलिए उनकी प्रसन्न्ता परिवार में सुख-शान्ति तथा मनोंकामनाओं की पूर्ति कर शोक विपत्ति चिन्ता परेशानियों को दूर कर देती हैं। सुख-सौभाग्य की कामना से माता संतोषी के 16 शुक्रवार तक व्रत किये जाने का विधान है।
